जून 2021 : वर्ष 27 II अंक 307

जून 2021 : वर्ष 27 II अंक 307

क्रम :: जून 2021 इस अंक में (इस माह के आकर्षण निम्न हैं. पाठक शीर्षक पर क्लिक करके पत्रिका पढ़...
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मई 2021 : वर्ष 27 II अंक 306

मई 2021 : वर्ष 27 II अंक 306

क्रम :: मई 2021 इस अंक में (पत्रिका पढ़ने के लिए कृपया शीर्षक पर क्लिक करें) संपादकीय कहानियाँ -अध्यापक जी...
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अप्रैल 2021 : वर्ष 27 II अंक 305

अप्रैल 2021 : वर्ष 27 II अंक 305

क्रम :: अप्रैल 2021 इस अंक में (पत्रिका पढ़ने के लिए कृपया शीर्षक पर क्लिक करें) संपादकीय कहानियाँ -तूफानी के बाद...
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मार्च 2021 : वर्ष 27 II अंक 304

मार्च 2021 : वर्ष 27 II अंक 304

क्रम :: मार्च 2021 इस अंक में (पत्रिका पढ़ने के लिए कृपया शीर्षक पर क्लिक करें) संपादकीय कहानियाँ –सरई फूल : अनिता...
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जनवरी-फ़रवरी  2021 : वर्ष 26 II अंक 303

जनवरी-फ़रवरी 2021 : वर्ष 26 II अंक 303

क्रम :: जनवरी-फरवरी 2021 इस अंक में संपादकीय कहानियाँ -पिता (बांग्ला कहानी) : तमाल बंद्योपाध्याय, अनुवाद : संजय राय -झब्बू...
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दिसंबर  2020 : वर्ष 26 II अंक 302

दिसंबर 2020 : वर्ष 26 II अंक 302

क्रम :: दिसंबर 2020 संपादकीय : विज्ञान की आजादी कविताएँ : जय गोस्वामी की दो कविताएं : हम पथिक हैं...
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नवंबर  2020 : वर्ष 26 II अंक 301

नवंबर 2020 : वर्ष 26 II अंक 301

क्रम :: नवंबर 2020 संपादकीय : अब क्या खोना बाकी है ! कविताएँ : शंकरानंद की तीन कविताएं युद्ध और...
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अक्टूबर 2020 : वर्ष 26 II अंक 300

अक्टूबर 2020 : वर्ष 26 II अंक 300

क्रम :: अक्टूबर 2020   आवरण तारक नाथ राय आवरण कथा : बच्चों की दुनिया का हाल :मो. आरिफ, पंकज...
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भारतीय भाषा परिषद की मासिक पत्रिका वागर्थ के ऑनलाइन संस्करण में आपका स्वागत है।

जून 2021 अंक 

(इस माह के आकर्षण निम्न हैं. पाठक शीर्षक पर क्लिक करके पत्रिका पढ़ सकते हैं.)

संपादकीय

श्रद्धांजलि (कृपया नीचे स्क्रॉल करके देखें।)

कहानियाँ

दर-ब-दर : ज़हीर कुरेशी

कीचड़ : सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव

बहस

हिंदी लोकवृत्त की समस्याएं, प्रस्तुति :  रमाशंकर सिंह/ विचार : अजय कुमार, अमितेश कुमार

कविताएं 

नरेंद्र पुंडरिक

अंबिका दत्त

मनोज कुमार झा

मनीषा झा

संजय राय

जावेद आलम खान

यात्रा संस्मरण

बेतवा और केन किनारे : सुधीर विद्यार्थी

विस्मृति से एतराज

गौहर जान का जमाना : मनीष कुमार मिश्रा/ उषा आलोक दुबे

विश्वदृष्टि

जार्जियन कवयित्री इका केवनिशविली की कविता, अंग्रेजी से अनुवाद : अवधेश प्रसाद सिंह

विविध 

पाठक की टिप्पणी

महामारी 1918 : चित्रकथा

बतरस

-मारवाड़ी राजबाड़ी : कुसुम खेमानी

लघुकथा

बदशगुनी : इश्तियाक़ सईद

विशेष मल्टीमीडिया प्रस्तुति :

पिता को समर्पित चार कविताएं : (अज्ञेय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, कुंवर नारायण और जावेद अख्तर) आवृत्ति- प्रियंका गुप्ता एवं सूर्यदेव रॉय

संपादकीय टीम :

संरक्षक :  इंद्रनाथ चौधुरी और स्वपन चक्रवर्ती
संपादक : शंभुनाथ
प्रबंध संपादक :प्रदीप चोपड़ा
प्रकाशक : डॉ. कुसुम खेमानी
संपादन सहयोग :सुशील कान्ति (vagarth.hindi@gmail.com, 7449503734)
मल्टीमीडिया संपादक : उपमा ऋचा (upma.vagarth@gmail.com)
आवरण : तारक नाथ राय
चित्रांकन साभार : संगीता किशोर, बीना प्रधान, एंग क्यूकोक, ललित जैन, पॉल निलाद्री, अमर सिंह, के.के. हैवर, शालिनी झा, लिंडा वी, क्यूबिज़्म आर्ट एवं गूगल
सदस्यता संबंधी विवरण और बिक्री संपर्क :
साधारण डाक खर्च सहित वार्षिक सदस्यता: 300 रुपए/तीन साल : 850 रुपए
आजीवन: 3000 रुपए /विदेश: वार्षिक: 40 डॉलर (रजिस्टर्ड बुक पोस्ट से मंगाने पर वार्षिक रु.240 अतिरिक्त भेजें)
भारतीय भाषा परिषद के नाम से चेक या ड्राफ्ट भेजें. एजेंसियों और सदस्यों द्वारा चेक से भुगतान bharatiya bhasha parishad के नाम या नेफ्ट द्वारा: कोटक महिंद्रा बैंक, शाखा: लाउडन स्ट्रीट,
Ac/no.  8111974982, IFSC-KKBK0006590 पर उपर्युक्त नाम से किए जा सकते हैं। भुगतान के बाद एसएमएस कर दें- मो.9163372683: मीनाक्षी दत्ता (सदस्यता और बिक्री)
11 बजे दिन से 6 बजे संध्या तक, समय पर भुगतान करने वाली एजेंसियों को ही हम भवष्यि में पत्रिका भेज पाएंगे।
प्रकाशित रचनाओं से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है।
सर्वाधिकार सुरक्षित, वागर्थ से संबंधित सभी विवाद कोलकाता न्यायालय के अधीन होगा।
प्रबंध : अमृता चतुर्वेदी
वितरण व अन्य कार्य : एस.पी. श्रीवास्तव, सूर्यदेव सिंह, अशोक बारीक, बैद्यनाथ कमती, खेत्राबासी बारीक, संतोष सिंह, प्रदीप नायक, प्रेम नायक।
वागर्थ रजिस्ट्रेशन नं. 61730/95/ कुसुम खेमानी द्वारा भारतीय भाषा परिषद, 36ए, शेक्सपियर सरणी, कोलकाता-17 के लिए  ऑनलाइन प्रकाशित और मुद्रित।

* श्रद्धांजलि *

नवल किशोर

सुखाड़िया विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्वअध्यक्ष और विख्यात आलोचक। मानववाद और साहित्यजैसे कालजयी ग्रंथ के लिए हिंदी जगत में सम्मानित थे। हिंदी आलोचना के क्षेत्र में विगत पचास से अधिक वर्षों से वे सक्रिय रहे।  विगत 16 मई को कोरोना से संक्रमित होकर निधन।

दिवाकर भट्ट

दिवाकर भट्ट उत्तरांचल में आधारशिलापत्रिका के संपादक और लेखक थे। साहित्य के लिए विपुल कार्य किया। लघु पत्रिका आंदोलन में निरंतर साथ। कोविड 19 ने हमसे अचानक छीन लिया।

लालबहादुर वर्मा

प्रसिद्ध इतिहासकार और साहित्यकार लाल बहादुर वर्मा जन इतिहास की अवधारणा और इसके लेखन के साथ विभिन्न जन आंदोलनों में सक्रिय थे। उनकी प्रतिबद्धता और जनपक्षधरता के लोग कायल थे। उनकी प्रमुख कृतियों में यूरोप का इतिहास‘, ‘इतिहास के बारे में’ ‘आधुनिक विश्व का इतिहासआदि शामिल हैं। इतिहासबोदध पत्रिका के संपादक रहे। नुक्कड़ नाटकों में गहरी रुचि रही। पिछले दिनों कोरोना वायरस से मृत्यु।

रेवती रमण

 हिंदी आलोचना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम करते हुए  बिहार विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में दीर्घ समय तक प्रोफेसर। प्रमुख आलोचना पुस्तकों मेंकविता और मानवीय संवेदना‘, ‘कविता का समकाल‘, ‘सर्जक की अंतर्दृष्टिआदि। कवि के रूप में भी सक्रिय। इन सबके साथ एक आत्मीय और संवेदनशील व्यक्तित्व। बिहार राष्ट्रभाषा परिषद का सम्मान। कोरोना संक्रमण ने हिंदी जगत से 17 मई को उन्हें हमसे छीन लिया।

नरेंद्र मोहन 

लाहौर में 1935 में जन्म। हिंदी आलोचना के अलावा नाटक के क्षेत्र में कई चर्चित कृतियां दीं, जैसे- कहे कबीर सुनो भाई साधो‘,  ‘मिस्टर जिन्ना‘, ‘मंच अंधेरे मेंआदि। आलोचना की प्रमुख किताबें— ‘कविता की वैचारिक भूमिका‘,  ‘विभाजन की त्रासदी : भारतीय कथा दृष्टि  कई कविता संग्रह प्रकाशित। कई साहित्यिक विधाओं में रचना करते हुए जीवन भर सक्रिय थे। विगत 11 मई 2021 को निधन।

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