कविताएं  : अभिषेक कुमार सिंह

कविताएं : अभिषेक कुमार सिंह

 युवा कवि।चार साझा ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित। 1. सूखे हुए तटों को भिगोने लगी नदीदुनिया की प्यास देख के रोने लगी नदीपहले निकल के आई निगाहों के रास्तेफिर धीरे-धीरे मुझको डुबोने लगी नदीमीलों चली पहाड़ की पथरीली देह परउतरी ज़मीं पे जैसे ही सोने लगी नदीअंधे विकासवाद का जंगल उगा है...