नवजागरण की समकालीन चेतना/ अच्युतानंद मिश्र

नवजागरण की समकालीन चेतना/ अच्युतानंद मिश्र

अच्युतानंद मिश्र युवा आलोचक। अद्यतन कविता संग्रह ‘आंख में तिनका’ और लेखों का संग्रह ‘बाजार के अरण्य में’।   नवजागरण के संदर्भ में जर्मन दार्शनिक एडोर्नो ने लिखा है ‘नवजागरण जरूरी है, मगर असंभव’। कोई भी समाज अपनी यथास्थितियों के विरुद्ध संघर्ष करता है, लड़ता है- यह...