अजय टोपवार

अजय टोपवार

    युवा कवि।शिक्षक, केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक  आदिवासी अस्मिता जंगल मेंमैं अकेला पेड़-सा खड़ा हूँअन्य पेड़ों के साथझाड़ियों के साथपहाड़ों के साथपहाड़ी नदियों के साथअन्य जंगली पशुओं के साथजंगल में मैं अकेला पेड़ ‘जंगल’ ही हूंसमय के साथ मैं बदला नहीं थाउसी जंगल...
ऋत्विक भारतीय

ऋत्विक भारतीय

    युवा कवि।दिल्ली विश्वविद्यालय में सीनियर रिसर्च फेलो। स्त्री गौर से देखो तो दिख जाएगी हर औरत की पीठ पर लदी एक गठरी गठरी जिसमें नहीं होगी धन-संपदा नहीं होगी विरासत के नाम पर जमा की गई कोई शेष पूंजी नहीं होगा स्त्री के नाम का कोई स्त्री-धन होंगी पुरखों की...
अजय टोपवार

अजय टोपवार

    युवा कवि।शिक्षक, केंद्रीय विद्यालय, लातेहार। क्या तुम्हें पता है विकास की आंधी मेंमेरे प्यारे, खूबसूरत, रंगीले पंखसेमल के रूई की तरह झर रहे हैंबेसमय, बेवजहक्या तुम्हें पता है? मेरे मधुर गीत-संगीत विकास के शोर मेंकहीं गुम हो रहे हैं सदा के लिएक्या तुम्हें...