कविता
युवा गजलकार। ‘इक उम्र मुकम्मल’, ‘कुछ निशान काग़ज़ पर’, ‘जी भर बतियाने के बाद’ एवं ‘जैसे बहुत क़रीब’ चार गजल संग्रह प्रकाशित। तकनीकी क्षेत्र में कार्यरत। गजल मौन ही साधे रही संसद, नहीं बतला सकीमुश्किलों, बरबादियों की हद नहीं बतला सकी रोशनी को साथ लेकर आ रही...
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