कविता
आदिवासी कविता चर्चित कवि, कहानीकार और स्तंभ लेखक। अद्यतन काव्य संग्रह ‘अघोषित उलगुलान’। हमें चाहिए पानीदार चेहरे मेरी उम्मीद राजधानी के ताले बंदचमकदार चेहरों से नहीं हैमैंने देखा है उन्हेंमजदूरों के बहुत पास से गुजरते हुएउनकी आंखों में न नमी है औरन ही उनकी कलाई की...
समीक्षा संवाद
जेसिंता केरकेट्टा का हाल में प्रकाशित तीसरा कविता संग्रह संग्रह है ‘ईश्वर और बाज़ार’।ईश्वर के नाम पर एक बाज़ार सजाया जा रहा है।मंदिर में प्रवेश करने से पहले व्यक्ति को बाजार में प्रवेश करना होगा।अब बाजार से होकर ही हम मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं।इस संग्रह की...
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