अफ़ग़ानिस्तान की बेटियां

अफ़ग़ानिस्तान की बेटियां

आज़ाद हवाओं में सांस लेने वालों के लिए कविता एक शगल हो सकती है, लेकिन बारूदी धुएँ से घुटी फिज़ाओं वाले अफगानिस्तान जैसे देशों में कवि होना, गुमनामियों और मौत को दावत देना है। खासतौर पर तब, जबकि आप एक स्त्री हों। लेकिन मायने तो इसी बात के हैं कि जब मौत सामने खड़ी हो तब आप...
भारत : एक देश, अनेक दृष्टियां

भारत : एक देश, अनेक दृष्टियां

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वागर्थ की विशेष मल्टी मीडिया प्रस्तुति फ़िराक़ एवं सुब्रह्मण्यम भारती रचना पाठ : गुरी, चिकित्सक डेन्वर कॉलरॉडो।वाचन स्वर एवं ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतुदृश्यांकन एवं संयोजन : उपमा ऋचासंगीत : ईशा योग केंद्रप्रस्तुति : वागर्थ भारतीय भाषा परिषद्...
धरोहर : बातें प्रेमचंद की

धरोहर : बातें प्रेमचंद की

महादेवी वर्मा : ‘प्रेमचंदजी के व्यक्तित्व में एक सहज संवेदना और ऐसी आत्मीयता थी, जो प्रत्येक साहित्यकार को प्राप्त नहीं होती। अपनी गम्भीर मर्मस्थर्शनी दृष्टि से उन्होंने जीवन के गंभीर सत्यों, मूल्यों का अनुसंधान किया और अपनी सहज सरलता से, आत्मीयता से उसे सब ओर...
वे आँखें : सुमित्रानंदन पंत

वे आँखें : सुमित्रानंदन पंत

प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की ने महज़ सुकुमार रंगों को ही नहीं सहेजा, उनकी दृष्टि सृष्टि के उस छोर तक गई, जहां जीवन के सबसे दारुण रंग बिखरे थे। यह समय, यह दुख की दारुण बेला जो हमारे सामने है उसमें उनकी यह कविता और प्रासंगिक हो उठी है। दुख की छाया ने सबको...
तुम्हारे बगैर : अवतार सिंह संधू ‘पाश’

तुम्हारे बगैर : अवतार सिंह संधू ‘पाश’

तुम्हारे बगैर… रचना : अवतार सिंह संधू ‘पाश’ आवृत्ति एवं संगीत संयोजन : अनुपमा ऋतुदृश्य संयोजन-संपादन एवं प्रस्तुति : उपमा ऋचा अनुपमा ऋतु, अवतार सिंह संधू ‘पाश’, उपमा...