मल्टीमीडिया
हर कोई जब छाती में बहुत से सपने और माथे में बहुत से ख़याल डाल कर घर से ज़िंदगी ख़रीदने निकलता है, और ज़िंदगी के बाज़ार में ज़िंदगी की क़ीमत सुनता है, तो उसकी छाती में खनकते सब सिक्के बेकार हो जाते हैं। एक ग़ुस्सा था रुके हुए पानी की तरह जिसके निकलने की कोई राह नहीं थी,...
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वाचन एवं ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु (लेखिका एवं अनुवादक)दृश्य संयोजन-सम्पादन : उपमा ऋचा (मल्टीमीडिया एडीटर वागर्थ)प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा...
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कविता पाठ :वाचन एवं ध्वनि संयोजन: अनुपमा ऋतु (लेखिका एवं अनुवादक)दृश्य संयोजन-सम्पादन : उपमा ऋचा (मल्टीमीडिया एडीटर वागर्थ)प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा...
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कविता पाठ : सूर्यदेव राय (कवि एवं रंगकर्मी)ध्वन्यांकन : अनुपमा ऋतु (लेखिका एवं अनुवादक)दृश्य संयोजन-सम्पादन : उपमा ऋचा (मल्टीमीडिया एडीटर वागर्थ)प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा ऋचा, सूर्यदेव...
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कविता पाठ और ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतुदृश्य संयोजन : उपमा ऋचा प्रस्तुति : वागर्थ, भारतीय भाषा पारिषद कोलकाता अनुपमा ऋतु, उपमा...
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