जयशंकर प्रसाद की कविताएं : आत्मकथ्य और बीती विभावरी जाग री

जयशंकर प्रसाद की कविताएं : आत्मकथ्य और बीती विभावरी जाग री

हिंदी साहित्य के कालजयी रचनाकार जयशंकर प्रसाद के जन्मदिन के अवसर पर वागर्थ की विशेष प्रस्तुति – आवृत्ति : डॉ. विवेक सिंहध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु कविता : बीती विभावरी जाग रीगायन : अजय रायनृत्य प्रस्तुति : डॉ स्मृति बाघेला वीडियो संयोजन एवं संपादन : उपमा...
जा तू अपनी राह बटोही : उपेंद्रनाथ अश्क

जा तू अपनी राह बटोही : उपेंद्रनाथ अश्क

हिंदी साहित्य के कालजयी रचनाकार उपेंद्रनाथ अश्क के जन्मदिन के अवसर पर उनके अल्पज्ञात कवि रूप को समर्पित वागर्थ की विशेष प्रस्तुति. रचना : जा तू अपनी राह बटोहीरचनाकार : उपेंद्रनाथ अश्क आवृत्ति : आयुष श्रीवास्तवध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु, संपादक अबे कलजुग! हिंदी की पहली...
चाहिए मुझे मेरा असंग बबूलपन : गजानन माधव मुक्तिबोध

चाहिए मुझे मेरा असंग बबूलपन : गजानन माधव मुक्तिबोध

हिंदी साहित्य के कालजयी रचनाकार गजानन माधव मुक्तिबोध के जन्मदिन के अवसर पर वागर्थ की विशेष प्रस्तुति – आवृत्ति : डॉ. विवेक सिंह, सहायक प्राध्यापक हिंदी विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ध्वनि संयोजन : अनुपमा ऋतु, युवा लेखिका एवं अनुवादक दृश्य संयोजन एवं संपादन :...
क्यों ज़रूरी हैं गांधी.

क्यों ज़रूरी हैं गांधी.

यक़ीनन महात्मा गांधी बहुत दोहराया गया विषय है, परंतु चरखा कातने से लेकर लेखन तक और दलित सुधार, गौ रक्षा, ग्राम स्वराज, प्राकृतिक चिकित्सा, अंत्योदय और श्रम की पूंजी के समर्थन से लेकर सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह तक उनके व्यक्तित्व के इतने कोण हैं। इतनी संभावनाएं हैं कि...
अफ़ग़ानिस्तान की बेटियां

अफ़ग़ानिस्तान की बेटियां

आज़ाद हवाओं में सांस लेने वालों के लिए कविता एक शगल हो सकती है, लेकिन बारूदी धुएँ से घुटी फिज़ाओं वाले अफगानिस्तान जैसे देशों में कवि होना, गुमनामियों और मौत को दावत देना है। खासतौर पर तब, जबकि आप एक स्त्री हों। लेकिन मायने तो इसी बात के हैं कि जब मौत सामने खड़ी हो तब आप...