कविताएं :  अर्चना लार्क

कविताएं : अर्चना लार्क

युवा कवयित्री।डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली में सहायक प्रोफेसर। शून्य वह जीती है कतरा कतराकुछ बचाती हैकुछ छींट देती है बीज की तरहहाथ जोड़ कहती हैलो उसके अभिनय से सीख ही लिया अभिनयचिल्लाती हैहकीकत में दुनिया अभिनय हैख़ामोश हो जाती हैअब लड़ाई भी खामोशियों से होने लगी...