कहानी
वरिष्ठ कथाकार।संप्रति केंद्रीय विद्यालय संगठन में ललित कला शिक्षिका के पद पर कार्यरत। सामने के खुले मैदान में अनगिनत पलाश वृक्ष के पत्तों की फागुनी पर धूप चमक रही थी। गुलमोहर की कलियां भी अपना शैशव तज, तरुणाई की अंगड़ाई ले, चटकने को तैयार थीं। दूर कहीं...
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