अश्विनी कुमार त्रिपाठी

अश्विनी कुमार त्रिपाठी

    युवा शायर। अद्यतन गजल संग्रह ‘हाशिए पर आदमी’। विभिन्न पत्रिकाओं में गजलें प्रकाशित। एक दर्द को अश्आर में कहने के फन से राब्ताहिज्र की रातों ने जोड़ा है सुखन से राब्ता पेड़ से दीमक का, रोगों का बदन से राब्तायूं भी है कुछ सर-फिरों का, इस वतन से राब्ता दिल के...
ग़ज़लें :  अश्विनी कुमार त्रिपाठी

ग़ज़लें : अश्विनी कुमार त्रिपाठी

    युवा शायर। अद्यतन ग़ज़ल संग्रह ‘हाशिये पर आदमी’। गजल 1.जब कभी बदलाव की ख़ातिर उठा है सर नयाउसको दिखलाया गया हर बार कोई डर नया पर्वतों को चीरकर राहें बना लेता है वोजो समझता है मुसीबत को भी इक अवसर नया हर गली कूचे मुहल्ले में लहर उन्माद कीकोई बतलाए कहां जा कर...
कविताएं  : अश्विनी कुमार त्रिपाठी

कविताएं : अश्विनी कुमार त्रिपाठी

युवा कवि।अनेक पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।संप्रति व्याख्याता। एक इक तमाचा गाल पर तब मार जाती है हवाजब वतन की सरहदों के पार जाती है हवाउनकी सांसों की महक लाती है मेरी सांस तकमुझ पे खुशियों का खजाना वार जाती है हवामेघ ला कर जब बुझाती है धरा की प्यास कोशोक में...
ग़ज़लें :  अश्विनी कुमार त्रिपाठी

ग़ज़लें : अश्विनी कुमार त्रिपाठी

      युवा गजलकार। संग्रह ‘हाशिये पर आदमी’।  पेशे से व्याख्याता (स्कूल शिक्षा)। एक  जो चिंतनशील थे इस देश के हालात को लेकर झगड़ बैठे वही आपस में अपनी ज़ात को लेकर   वो सारे लोग भी दो गज ज़मीं में ही दफन होंगे वहम  पाले हुए हैं जो  मेरी औकात  को...