तीजी : अवधेश प्रसाद सिंह

तीजी : अवधेश प्रसाद सिंह

वरिष्ठ लेखक, भाषाविद और अनुवादक। पीपल की फुनगी से उतरता सूरज अपना पीला चेहरा ईख के सूखे पत्तों में छिपाने की जुगत में था।दिन भर खेत-पथार में खटने के बाद गांव के किसान-मजदूर अब फरागत पाकर हाथ-पैर धो रहे थे।कुछ लोग अपने मवेशियों की नाद में चारे की आखिरी टोकरी डाल चुके...
श्री लंका की कविताएं 2, अनुवाद : अवधेश प्रसाद सिंह

श्री लंका की कविताएं 2, अनुवाद : अवधेश प्रसाद सिंह

हिंदी अनुवाद- राजेश कुमार झा लेखक, भाषाविद और अनुवादक। सीरी गुणसिंघे (1925-2017) श्री लंका के सुप्रसिद्ध कवि और आलोचक।प्रमुख कविता पुस्तकें :‘अबि निकमाना’, ‘राथु केकुला’ और ‘अलकामंडावा’। भैंसा जल रही थी मेरी दाढ़ीघबराकर मैं भाग रहा थादौड़ता हुआ नीचे की ओरहोने वाला था...
यूक्रेन-रूस युद्ध पर बुद्धिजीवी : अवधेश प्रसाद सिंह

यूक्रेन-रूस युद्ध पर बुद्धिजीवी : अवधेश प्रसाद सिंह

    वरिष्ठ लेखक, भाषाविद और अनुवादक। रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन से युद्ध शुरू किया था।अब तक काफी लोग हताहत हो चुके हैं।रूस अपने आक्रमण को विशेष सैनिक अभियान कह रहा है।उसका मानना है कि यूक्रेन में नव-नाजियों की सरकार है।दूसरा तर्क है कि यूक्रेन में...
यूक्रेनी कविताएं 2, अंग्रेजी से अनुवाद : अवधेश प्रसाद सिंह

यूक्रेनी कविताएं 2, अंग्रेजी से अनुवाद : अवधेश प्रसाद सिंह

(1974) यूक्रेन की प्रमुख कवयित्री और अनुवादक।सवीव स्टेट यूनिवर्सिटी में मध्यकालीन साहित्य की प्रोफेसर।बच्चों पर लिखी गई रचनाएँ पंद्रह भाषाओं में अनूदित।प्रमुख काव्य कृतियां – ‘जर्नीज इन सर्च ऑफ होम’, ‘द फेस बीअंड द फोटोग्राफ’।अनेक यूक्रेनियन और यूरोपियन...
मुट्ठीभर धूप : अवधेश प्रसाद सिंह

मुट्ठीभर धूप : अवधेश प्रसाद सिंह

    लेखक, भाषाविद और अनुवादक। वह दूसरे दरवाजे से घुटनों के बल आतीपड़ोस की सद्यःजात स्त्री काआँचल सरकाकरबेधड़क दूध पीने लग जातीवह नहीं जानती थीजातपांत और संप्रदाय मेंबुरी तरह बंटे गांव कोअपनी छोटी जात औरउस स्त्री की बड़ी जात कोजो सहज पिला देती थीअपने बेटे के...