कविता
युवा गजलकार। जयप्रकाश विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक। कुछ साझा संकलनों में गजलें प्रकाशित। गजल 1.चलो, कुछ तो है जो कि सारा मिला हैहमें मुश्किलों का पिटारा मिला है कहीं जो मुकद्दर का मारा दिखा तोलगा कोई हमको, हमारा मिला है फंसी थी भंवर में ये कश्ती...
कविता
युवा गजलकार। अपना सबकुछ छोड़ रहा हैघर का राशन जोड़ रहा है कहते वालिद-अब्बा जिसकोकितना खुद को तोड़ रहा है खून पसीना हर पैसा मेंसबकी किस्मत जोड़ रहा है लाख कमाता बेटा फिर भीअपना गुल्लक फोड़ रहा है जब से बैठा पापा घर मेंबेटा भी मुंह मोड़ रहा है। संपर्क :...
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