कविता
युवा कवि।झारखंड सरकार में कार्यरत। दो तितलियां तुम्हारी जमीन भी नहीं है उतनीजिसकोतुम रोज रौंदते होतुम्हारे हिस्सेबस उतना ही हैजिस परतुम्हारे कदमों के निशानबाकी रह गए हैं तुम्हारा समय भी नहीं है उतनाजिसकोतुम रोज देखते होबंद मुट्ठी से फिसलतेतुम्हारा समय...
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