मैं किसान हूँ, कवि नहीं हूँ कि  कल्पना से काम चल जाएगा! : चंद्र मोहन

मैं किसान हूँ, कवि नहीं हूँ कि कल्पना से काम चल जाएगा! : चंद्र मोहन

युवा कवि। अभी भी अभी भी लकड़ी का हल चलता है यहांअभी भी हजारों जोड़ी बैलों सेखेतों को जोता जाता हैअभी भी गन्ने के खेतों मेंबहुत रस बचा हुआ हैअभी भी जंगलों मेंजंगली हाथी गरजते हैं बादल से भी तेज अभी भी एक प्राचीन कविकविता की पत्थलगड़ी करता हैजंगलों से जमीनों सेखदेड़े...