मँगरा कीड़ा : चंद्रेश्वर

मँगरा कीड़ा : चंद्रेश्वर

    वरिष्ठ कवि और बलरामपुर में प्रोफेसर।कविता संग्रह -‘अब भी’, ‘सामने से मेरे’ और ‘डुमरांव नजर आएगा’। चापलूस किसी समाजया संस्था में होते हैंमँगरा कीड़े की तरहजो साबुत लकड़ीया हरे-भरे पेड़ के स्वस्थ मोटे तनेया टहनी को भी कर डालते हैं खोखला चापलूसी से क्षति...