चंद्रेश्वर

चंद्रेश्वर

    वरिष्ठ कवि। कविता संग्रह, ‘अब भी’, ‘सामने से मेरे’ और ‘डुमरांव नजर आएगा’। भोजपुरी में भी लेखन। हार कर नहीं हारा क़स्बे की चाय दुकान मेंटूटही बेंचहिलती मेज़ की संगति में रहते हुएलिखी मैंने कई कविताएं मोबाइल सेदोपहर शाम के वक़्त लिखते वक्त घिरे रहनासामान्य...
चंद्रेश्वर

चंद्रेश्वर

    प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन। अद्यतन कविता संग्रह ‘डुमरांव नजर आएगा’। भोजपुरी में भी लेखन। मेरे पास न लाठी न भाला मेरे पास न लाठी न भालान तीर न कमान न ढाल न तलवारन गोली न बंदूक बस एक सीना किसी नवजातशिशु के कोमल माथे के बराबर! किसी...
चंद्रेश्वर

चंद्रेश्वर

    वरिष्ठ कवि। अद्यतन कविता संग्रह ‘डुमराँव नजर आएगा’। डिजिटल दुनिया की नैतिकता जीते जी नहीं पूछता था कोईऔर मरते ही बाढ़ आ जाती थीडिजिटल दुनिया मेंसादर नमनआखिरी सलामगोया बेताब बैठे थेखाली लोगबाग इस दुनिया मेंये शब्द लिखने के लिएया फिर कर रहा था चूक मैं...
चंद्रेश्वर

चंद्रेश्वर

    वरिष्ठ कवि। अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित। तीन कविता संग्रह- ‘अब भी’, ‘सामने से मेरे’, ‘डुमरांव नजर आएगा’। वे मंज़िल नहीं जानती थीं एक अरसे बाद दिखाझुंड भेड़ों का सड़कों परअपने गड़रियों के साथवे चल रही थींबांस की पतली छड़ी के इशारों परडरी-सहमी-सकुचाई-सी उनकी न...
मँगरा कीड़ा : चंद्रेश्वर

मँगरा कीड़ा : चंद्रेश्वर

    वरिष्ठ कवि और बलरामपुर में प्रोफेसर।कविता संग्रह -‘अब भी’, ‘सामने से मेरे’ और ‘डुमरांव नजर आएगा’। चापलूस किसी समाजया संस्था में होते हैंमँगरा कीड़े की तरहजो साबुत लकड़ीया हरे-भरे पेड़ के स्वस्थ मोटे तनेया टहनी को भी कर डालते हैं खोखला चापलूसी से क्षति...