कविता
युवा कवि। असिस्टेंट प्रोफेसर। सुगनी उरांव स्कूल की घंटी बजीअध्यापक कक्षा में आएबच्चे पढ़ने में लग गएपीछे बेंच पर तेरह साल की बच्चीसुगनी ऊरांव उदास बैठी थीचेहरे के अनंत भावों को दबाएमन को किताब में छिपाएपेट का खालीपन भर रही थीखाली हो रहे पानी के बोतल से...
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