दिनेश अत्रि कविता वरिष्ठ कवि। दो कविता संग्रह – ‘रिबन की पीली पंखुड़ी’ और ‘कबाड़ में ट्यूबलाइट’। घर 1देख रहा हूँ… कुछ दिनों सेघोंसला नहीं हैबिखरे हैं तिनकेआले, वाशबेसिन मेंकोने में कमरे केबिजली के तार परचौखट जड़ी कील परयहां… वहां..एक बिखरी हुई अवधारणा है...
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