कविता
छत्तीसगढ़ के एक पिछड़े गांव में जन्म। सामाजिक, सांस्कृतिक, ट्रेड यूनियन और जनांदोलन में भागीदारी। वर्तमान में कोलकाता में रहकर अनुवाद एवं लेखन के कार्य में संलग्न हैं। ऐसा न हो धरती लहलहाती हैदेह से टपकती बूंदों के दम परक्या ठंड और क्या बरसातचिलचिलाती...
Recent Comments