जल रंग : एकांत श्रीवास्तव

जल रंग : एकांत श्रीवास्तव

सुपरिचित कवि। ‘वागर्थ’ का लंबे समय तक संपादन।अद्यतन उपन्यास ‘पानी भीतर फूल’ (उपन्यास), ‘चल हंसा वा देश’ (यात्रा निबंध)।संप्रति दिल्ली में शासकीय सेवा में। पानी का कोई रंग नहीं होता।उसमे जो रंग पड़ता है, वह उसी रंग का हो जाता है।फिर भी कुछ चीजों के रंग को जल रंग या पानी...
छत्तीसगढ़ी कविताएँ  : एकांत श्रीवास्तव

छत्तीसगढ़ी कविताएँ : एकांत श्रीवास्तव

सुपरिचित कवि।‘वागर्थ’ का लंबे समय तक संपादन। अद्यतन आलोचना पुस्तक ‘आधुनिक हिंदी कविता और काव्यानुभूति’। संप्रति दिल्ली में शासकीय सेवा में। प्यास कभी दाहरा के तट जाता हूँ कभी नदिया के पास कैसी यह प्यास है यह प्यास नहीं बुझती समुद्र के पास जाने के बारे में सोचता हूँ...