कविता
युवा कवयित्री। संप्रति अयोध्या में राज्य कर अधिकारी। कविता संग्रह ‘चाक पे माटी सा मन’। मैं नदी हूँ मैं नदी हूँगुजर जाऊंगीतुम्हारे भीतर से चुपचापनक्शे पर बिन छोड़े कोई निशान बिखरूंगी नहीं तुम्हारी आंखों में यकीन मानोक्षणिक सौंदर्य बनकरकिसी झरने की...
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