कविता
युवा कवि।भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू में शोधार्थी। शर्मिंदगी वे पौधेजो मेरी अनियमितताओं के शिकार होकरसूख गएवे फूलजिन्होंने मेरी लापरवाही के कारण खो दियाअपना रंगवह कमराजिसने मेरी मनःस्थिति कोहद चुप्पी तक बर्दाश्त कियावह टेबलजिसने बेतरतीबी की इन्तहां तक मुझे...
Recent Comments