कविता
युवा कवयित्री।विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। उम्मीद तूफानी हवा और बारिश से बचाकरतुलसी पीढ़े के धरखे परहर रोज जलाती थी मांएक दीयाजैसे वह दीया न होकरकोई सपना होधरखे पर जमीं कालिख सेबना लेती थीं काजलहम कहते मां!मत लगाया करो काजलबिलकुल नहीं...
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