हाव तुका मॉग करता : जयश्री रॉय

हाव तुका मॉग करता : जयश्री रॉय

    दस कहानी संकलन, ५ उपन्यास, एक कविता संकलन प्रकाशित तथा ४ कहानी संकलनों का संपादन।अद्यतन उपन्यास ‘थोड़ी सी जमीन थोड़ा आसमान’। ‘साईबा! ओ साईबा!’ मछली की टोकरी सर से उतार कर वेंसी बरामदे में बैठी चिल्लाए जा रही थी। साहिबा को तेज गुस्सा आया। वह दर्जन भर बांगड़े...
मुझ जैसी कोई : जयश्री रॉय

मुझ जैसी कोई : जयश्री रॉय

    दस कहानी संकलन, ५ उपन्यास, एक कविता संकलन प्रकाशित तथा ४ कहानी संकलनों का संपादन।अद्यतन उपन्यास ‘थोड़ी सी जमीन थोड़ा आसमान’। मैं उसे देखती रही थी, न जाने क्यों! कोई खास बात नहीं थी उसमें- व्हील चेयर पर बैठी एक उम्रदराज औरत, उतनी ही उदास जितनी कि शायद उसे...