कविताएँ जावेद आलम खान

कविताएँ जावेद आलम खान

      युवा कवि, शिक्षा निदेशालय, दिल्ली के अधीन शिक्षक। मुझे टुकड़ा-टुकड़ा बांट देना किसी दिन पानी-सा बहूंजमूं पिघलूं और भाप बन बादल में रहूं किसी दिन बदल जाऊं आग मेंभभकूं सुलगूं और बदल जाऊं राख में किसी दिन हवा हो जाऊंउड़ू उड़ाऊं और वायुमंडल में खो...