जय चक्रवर्ती

जय चक्रवर्ती

समकालीन हिंदी गजल एवं दोहे की आठ किताबें प्रकाशित। गजल सीने में अपने थोड़ी-सी आग बचाकर रखजीवन में हर पल जीवन का राग बचाकर रख अपने को बेशक रख दे थोड़ा-थोड़ा सबमेंलेकिन अपने में अपना कुछ भाग बचाकर रख पास न आने दे हरगिज़ उम्मीदों को ज़्यादाउम्मीदों की दहलीज़ों पर त्याग बचाकर...
ज़िंदा हैं अभी संभावनाएं : जय चक्रवर्ती

ज़िंदा हैं अभी संभावनाएं : जय चक्रवर्ती

 वरिष्ठ कवि।प्रकाशित कृतियाँ : संदर्भों की आग, ज़िंदा हैं आँखें अभी (दोहा संग्रह), थोड़ा लिखा समझना ज़्यादा (नवगीत संग्रह), हमारे शब्द बोलेंगे (मुक्तक संग्रह)। एक पर-टूटे परिंदे नेभरी उड़ानजिंदा हैं अभी संभावनाएंचुप्पियों की गांठ को खोला किसी नेशब्द में स्वर को तनिक घोला...