कविता
वरिष्ठ कवयित्री। पेशे से चित्रकार और कत्थक नर्तकी। चैती (कोयल तोरी बोलिया) मुझे अंदाजा हैकोयल नहीं बोली होगी-आधी रातकेवल गहराती आई होगीजीवन के आने औरबेलौस चले जाने से हतप्रभकोई पुरातन बेचैनी जो दुख मन में नहीं अंटताउसे लपेट लिया होगा तुमनेएक गीत मेंऔर रख...
कविता
मुख्यतः पेशे से चित्रकार और कत्थक नर्तकी।कविताओं में गहरी रुचि। नाव और सीता नाव नदी को अपनाघर कहती हैया घाट कोया समझती है खुद कोअब भीएक विस्थापित पेड़… केवट के लिए यह सवालबेमानी थाउसकी चिंता केवलनाव के स्त्री में बदल जाने परटिकी हुई थी रामकेवट की...
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