ज्योति मिश्रा

ज्योति मिश्रा

    कवयित्री। विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों में संलग्न। कुछ साझा संकलन। गजल कट गए सारे बगीचे और अमराई गईपेड़ों के झूले गए हैं शोख पुरवाई गई मुद्दतों से इस चमन में खिल रहा कुछ भी नहींभौंरे तितली और बुलबुल की शनासाई गई हुस्न की रंगत गई और इश्क फीका पड़ गयाफूल...
अनुत्तरित प्रश्न : ज्योति मिश्रा

अनुत्तरित प्रश्न : ज्योति मिश्रा

छड़ी हथेली पर लगी तो एक छोटी कक्षा में चीकू की रुलाई फूट पड़ी। मास्टर साहब ने गुस्से में चीकू की उत्तर पुस्तिका छीनते हुए कड़क आवाज में कहा, ‘परीक्षा में नकल करते हो…! क्या नकल करके लिखा है, दिखाओ।’ चीकू ने सहमी हुई आवाज में कहा, ‘…मास्टर जी! कुछ नहीं। बस एक...
वजूद और मन : ज्योति मिश्रा

वजूद और मन : ज्योति मिश्रा

    निरंतर सृजनरत कवयित्री। वजूद हरा था जब तकयह सूखा पत्तावृक्ष के प्राण बनउसे खिलाता थाउसे जिलाता थाझर गया डाल सेअब जर्द होकरलेकिन खत्म नहीं हुआइसका वजूदहवा के साथ यह उड़ेगाजारी रहेगा इसका सफरबची हैं इसमें संभावनाएंकिसी चिड़िया का आशियाना बनाने कीकिसी की भूख...