ज्योतिकृष्ण वर्मा की तीन कविताएं

ज्योतिकृष्ण वर्मा की तीन कविताएं

    कविता संग्रह ‘खुले आकाश में’ प्रकाशित। 1-पुकार मैं तुम्हारे दुख में शामिल था चुपचाप पर कहा नहीं तुमसे मैं देख रहा था तुम्हें फूट फूट कर रोते हुए पर उंगलियों से अपनी पोंछे नहीं मैंने तुम्हारे आंसू मैं देख रहा था तुम खोई हुई थी और तैर रही थी एक लंबी थकान...