वैष्णव जन तो तेने कहिए : कमलेश

वैष्णव जन तो तेने कहिए : कमलेश

    लंबे समय तक अखबार में समाचार संपादक के पद पर कार्य। कई नुक्कड़ नाटकों का लेखन, निर्देशन और अभिनय। दो कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’ और ‘पत्थलगड़ी और अन्य कहानियां’ प्रकाशित।   इस सुदूर गांव में ये सातवां साल। इतना लंबा समय एक ऐसे गांव में जहां न कोई जान न...
राजा बनोगे तो क्या खाओगे : कमलेश

राजा बनोगे तो क्या खाओगे : कमलेश

    लंबे समय तक अखबार में समाचार संपादक के पद पर कार्य। कई नुक्कड़ नाटकों का लेखन, निर्देशन और अभिनय। दो कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’ और ‘पत्थलगड़ी और अन्य कहानियां’ प्रकाशित। राजा बनोगे तो क्या खाओगे…? सोनाचूर का भात, रहर की मसालेदार दाल और आलू-कटहल की...
बबुआन : कमलेश

बबुआन : कमलेश

    सुपरिचित कहानीकार और पत्रकार।कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’।संप्रति ‘हिन्दुस्तान’, रांची में समाचार संपादक। उनके कई नाम थे। इतने नाम कि वे भी अपना असली नाम भूल गए।बचपन में छोटन सिंह, बबुआ सिंह और सरदार सिंह जैसे नाम।जवानी में नाम पड़ा बबुआन तो बुढ़ौती में बाबू...
इनरासन की परी : कमलेश

इनरासन की परी : कमलेश

सुपरिचित कहानीकार और पत्रकार। कहानी संग्रह ‘दक्खिन टोला’। संप्रति ‘हिन्दुस्तान’ रांची में समाचार संपादक। कम की दवाई है बेटा, अधिक की दवाई नहीं। सुबह के साढ़े नौ बजे नहीं कि महेसर हलवाई की आवाज गूंज जाती। आवाज भी इतनी तेज कि पूरा रामरेखा घाट जान जाता कि महेसर हलवाई के...