कविता
युवा कवयित्री।अतिथि प्राध्यापक, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, दरभंगा हाउस, पटना विश्वविद्यालय। उसकी आग टूट करजी रही हूँजैसे डाली से टूट करजीता है कोई पत्ताऔरकिसी चूल्हे में एक दिनजल जाता हैताकि कोईउसकी आग कोरोटियों में दबाकर खा सके। मेरे सपने रात के आखिरी पहर...
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