कविता
युवा कवयित्री। पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित। मेरे हठ इंकार की भाषा है हिंदी हमारे सामूहिक दुख की भाषा है हिंदीदादी की कहानियों का सार है मां के कारुणिक गीतों की पुकार हैमैंने हिंदी में ही कहा माँ सेआगे पढ़ना है शहर जाने दो मैंने हिंदी में ही कहा...
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