कविता
वरिष्ठ कवि और पत्रकार। चार कविता संग्रह और तीन गद्य कृतियां प्रकाशित। संप्रति लखनऊ से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘रेवांत’ के प्रधान संपादक। जीवन प्रार्थना के शिल्प में एक ही दिनएक ही समयतीन तीन जलसे कहां जाऊं, कहां न जाऊंन जाऊं तो नाराजगी...
कविता
वरिष्ठ कवि और संस्कृतिकर्मी।अद्यतन कविता संग्रह ‘उम्मीद चिनगारी की तरह’।साहित्यिक पत्रिका ‘रेवान्त’ के प्रधान संपादक। सुख-चरम सुख सुख!क्या होता है यह? चरम सुख!क्या है यह बला? मैं कहां जान पाईसुख, चरम सुख और पता नहीं क्या क्या सुख…बचपन से मां-बापू...
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