कविता
मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ लेखन से जुड़े हुए।अंग्रेज़ी की अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित। ‘मिथिला रिव्यू’, ‘जैगरी लिट’, ‘उसावा लिटरेरी रिव्यू’ के संपादक मंडल के सदस्य। बसंत के अनाम नीले फूलों से ढकी क्यारीलगती...
लघुकथा
पापा के साथ नैनीताल के माल रोड पर घूम रहा था।तभी छलांग लगाने की मुद्रा में रखे हुए थर्मोकोल का मेंढक खरीदने की इच्छा हुई।दुकान लगाकर बैठी छोटी लड़की से दाम पूछा तो उसने 25 रुपये बताए। लड़की से पूछा- क्यों, कम में नहीं देगी? पांच-दस रुपये से ज्यादा का वैसे भी नहीं है।...
कहानी
15 जून, 2020 सामने की खिड़की से पलाश का एक पेड़ दिखता है, झुकी डालियों पर लाल दहकते फूल कोनों से जलने लगे हैं; क्या अपनी अल्पायु के आखिरी क्षणों के सरपट खत्म होने का जरा-भी दुख उन्हें नहीं सालता? अल्पायु मैं, कोरोना से ग्रस्त, निपट एकाकी।मुझे कल यहां भर्ती किया गया।बस...
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