कुमार विनोद

कुमार विनोद

    वरिष्ठ गजलकार। दो गजल संग्रह, एक कविता संग्रह और एक व्यंग्य संग्रह।  गजल नजर में उलझनें कितनी, दहकती आग, पानी भीकि अंधी दौड़ में शामिल है बचपन भी, जवानी भी डराता है मुझे इक ख्वाब अक्सर नींद में आकरकि जंगल में हुई तब्दील आखिर राजधानी भी रियाया की तरफ देखा,...