कुंवर रवींद्र सिंह

कुंवर रवींद्र सिंह

    युवा कवि।संप्रति सरकारी सेवा में।  बच्चे और युद्ध क्या करोगेअपने जीते हुए सब भूखंडों काजब उनमें उगे किसी फूल को देखकरमुस्करा नहीं सकेंगेबारूदों के धमाकों से डरे सहमेतुम्हारे बच्चेजब वे आसानी से नहीं बना पाएंगेकिसी अजनबी हमउम्र को अपना दोस्तमौत का अट्टहास...
कुंवर रवींद्र सिंह

कुंवर रवींद्र सिंह

    युवा कवि।संप्रति इंडियन बैंक में प्रबंधक। जंग के बाद एक दिन जब जंग खत्म होगीइतिहास के हिस्से आएंगेकलंक के कुछ और पन्नेभूगोल को नए नक्शे मिलेंगेसमय को मिलेंगीनई विद्रूपताएंनदियों पहाड़ों जंगलों को मिलेंगेनए परिचयजिससे वे अब पहचाने जाएंगेगर्व और उन्माद से...