शिव कुशवाहा

शिव कुशवाहा

    युवा कवि। काव्य संग्रह ‘तो सुनो’ और ‘दुनिया लौट आएगी’। संप्रतिः अध्यापन।   उम्मीद के पहाड़ समय अपने सुनहरे पंख लगाकरउड़ रहा है अनंत ऊचाइयों परवह मुट्ठी से फिसलती रेत की मानिंदफिसल रहा है हमारी पहुंच से बहुत दूर आकाश में उड़ रहे पंछीसमय की पदचाप सुन रहे...
शिव कुशवाहा

शिव कुशवाहा

  युवा कवि। काव्य संग्रह ‘तो सुनो’ और ‘दुनिया लौट आएगी’। संप्रतिः अध्यापन। इतिहास प्राचीर में लगे हुए पत्थरों परवास्तुकला के कुशल कारीगरजब उकेरते हैं विभिन्न चित्रकारीतब वह साक्षी होता है इतिहास का हवाओं में खड़खड़ाता हुआ इतिहासमिट्टी में मिली सोंधी सुगंध की...