उत्तर-आधुनिकता : युग और युगांत, प्रस्तुति : मधु सिंह

उत्तर-आधुनिकता : युग और युगांत, प्रस्तुति : मधु सिंह

युवा लेखिका और संस्कृतिकर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय से हाल में डॉक्टरेट की उपाधि। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण। ​ आधुनिक काल के मूल्यों से भिन्न उत्तर-आधुनिकता एक सांस्कृतिक और बौद्धिक आंदोलन है जो 20वीं शताब्दी के मध्य में शुरू हुआ था। यह आंदोलन...
साठोत्तरी साहित्य की खोई आवाजें, प्रस्तुति : मधु सिंह

साठोत्तरी साहित्य की खोई आवाजें, प्रस्तुति : मधु सिंह

युवा लेखिका और संस्कृतिकर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय से हाल में डॉक्टरेट की उपाधि। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण। साहित्य का लक्ष्य हमेशा से खोई आवाजों को नव-स्वर देना रहा है। जिस तरह से वाल्मीकि ने क्रौंच-वध की व्यथा को खोने नहीं दिया था जिस तरह से भक्त...
दलित कहानियों का स्त्री पक्ष : मधु सिंह

दलित कहानियों का स्त्री पक्ष : मधु सिंह

      युवा लेखिका और संस्कृतिकर्मी। विद्यासागर विश्वविद्यालय से हाल में डॉक्टरेट की उपाधि। कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण। आज की कहानी नई रचनाधर्मिता और सामुदायिक उभार के कारण बदली दिखती है। इसका स्वर जितना आधुनिक विमर्शों से जुड़ा है, उतना ही...
लोकप्रियतावाद का नया दौर- प्रस्तुति : मधु सिंह

लोकप्रियतावाद का नया दौर- प्रस्तुति : मधु सिंह

विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में पीएच.डी. की शोध छात्रा।कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण। लोकप्रियतावाद एक इंद्रजाल की तरह है, जिसके आकर्षण से लोग बच नहीं पाते हैं। आज बाजार, प्रबंधन, मीडिया और टेक्नोलॉजी द्वारा बुने गए जाल में आम आदमी उलझता जा रहा है।...
कविता और जीवन का संवाद : मधु सिंह

कविता और जीवन का संवाद : मधु सिंह

    युवा लेखिका।विद्यासागर विश्वविद्यालय, मेदिनीपुर में पीएच.डी. की शोध छात्रा।कोलकाता के खुदीराम बोस कॉलेज में शिक्षण। कविता और मनुष्य का पुराना सृजनात्मक नाता है।कविता मानव मन की कई उलझनों को स्पष्ट करने और कई बार चेतना को जगाने का काम करती है।यह गहरे...