स्वप्न : लैंग्स्टन ह्यूज़, अनुवाद : महिमा श्रीवास्तव

स्वप्न : लैंग्स्टन ह्यूज़, अनुवाद : महिमा श्रीवास्तव

महिला रोग चिकित्सक, वरिष्ठ आचार्य लैंग्स्टन ह्यूज़  (1902- 1967) अमरीकी कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, उपन्यासकार और नाटककार।जाज़ कविता के प्रारंभकर्ताओं में से एक। स्वप्नों को कसके पकड़े रखो क्योंकि यदि स्वप्न मरे तो जीवन एक कटे परवाली चिरैया है जो उड़ नहीं सकती स्वप्नों...