कविता
युवा कवयित्री और सहायक शिक्षिका। भाषा मैंने अपनी भाषा में हँसी लिखीसामने बैठा व्यक्तिजो मेरी भाषा नहीं जानता थाउसने हँसना शुरू कर दिया मैंने अपनी भाषा में लिखा रुदनमेरे पास की महिलाओं नेरोना शुरू कर दियारोते हुए बड़बड़ाने लगींअपनी भाषा मेंमैं नासमझी के...
कविता
युवा कवयित्री और सहायक शिक्षिका। तुम और मैं तुमने कहा था खुश रखोगे मुझेहुआ भी कुछ ऐसा हीअब मैं सिर्फ खुश रहती हूँमुस्कराती हूँ रूठना तो मैंने कबके छोड़ दियाबात मानोमैंने एक दो बार रूठ कर देखा हैकोई मनाने आया ही नहींअब मैं सिर्फ हँसती हूँ मेरे मुस्कुराने...
कविता
युवा कवयित्री और सहायक शिक्षिका। देवीपुर की औरतेंमाथे पर कड़ाह लिएगंवई साड़ी मेंकमर में गमछा लपेटेजब चलती हैं नंगे पैरधरती के सबसे करीब होती हैंदेवीपुर की औरतेंहाथों में हथौड़ा लिएचढ़ती हैं लोकल ट्रेन मेंढूंढती हैं जगहक्षण भर आराम के लिए नहींसखियों के संग गपियाने के...
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