साहित्य उत्सव का नया दौर, प्रस्तुति :मनोज मोहन

साहित्य उत्सव का नया दौर, प्रस्तुति :मनोज मोहन

कवि और पत्रकार।सीएसडीएस की पत्रिका ‘प्रतिमान’ से संबद्ध। साहित्य का भविष्य धीरे-धीरे गंभीर चिंतन का विषय बन गया है।बड़े साहित्य उत्सवों ने इसके भविष्य के संबंध में कुछ नए संकेत दिए हैं, जिनपर विस्तृत चर्चा जरूरी है।मैंने प्रयास किया, पर फेस्टिवल में जाने के अवसर और...
भारतीय बुद्धिजीवियों का संकट प्रस्तुति :मनोज मोहन

भारतीय बुद्धिजीवियों का संकट प्रस्तुति :मनोज मोहन

कवि और पत्रकार।सीएसडीएस की पत्रिका ‘प्रतिमान’ से संबद्ध। भारतीय बुद्धिजीवी और देश के आम लोगों के बीच कितना संबंध बचा हुआ है, यह चिंता का विषय होना चाहिए।भारतीय बुद्धिजीवी समुदाय के साथ-साथ हिंदुस्तानी बौद्धिक समाज के बारे में सोचा जाना चाहिए कि वह किस संकट से गुजर रहा...
बहस : वर्तमान विश्व में विज्ञान का हाल

बहस : वर्तमान विश्व में विज्ञान का हाल

प्रस्तुति : मनोज मोहन हिंदी के साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया में निरंतर सक्रिय। वर्तमान में सीएसडीएस की पत्रिका ‘प्रतिमान : समय समाज संस्कृति’  के संपादकीय विभाग से संबद्ध। दुनिया में विज्ञान की जगह टेक्नोलॉजी का महत्व बढ़ा है और जैसे पश्चिमी देश ही एक बार...
बहस : नई शिक्षा – कैसा प्रस्थान चाहिए

बहस : नई शिक्षा – कैसा प्रस्थान चाहिए

प्रस्तुति : मनोज मोहन हिंदी के साहित्यिक-सांस्कृतिक दुनिया में निरंतर सक्रिय। वर्तमान में सीएसडीएस की पत्रिका ‘प्रतिमान : समय समाज संस्कृति’  के संपादकीय विभाग से संबद्ध। भारतीय शिक्षा की बात करें तो उसके तीन स्तर उभर कर आते है–स्कूली शिक्षा, उच्चशिक्षा और...