कविता
असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय। काव्य संग्रह- ‘अरे ओ वसंत!’ बहस हम एक दिन करेंगे बहस हम बहस करेंगेअट्टालिकाओं के कंगूरेजिनकी रोशनी से जगमगाते हैंउनके घर को अंधेरे क्यों खा जाते हैं हम बहस करेंगेशहर कौन सी डुगडुगी बजाता हैकि गोबर...
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