मेघाली बनर्जी

मेघाली बनर्जी

    युवा कवयित्री।कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की छात्रा। मैंने लोगों को देखा है मैंने लोगों को जीते देखा हैबच्चों की किलकारियों मेंबारिश की पहली बूंद के गिरने मेंफूलों की पंखुरियों को निहारने मेंमैंने लोगों को जीते देखा है देखा है लोगों कोघड़ी की सुई...