मिथिलेश राय

मिथिलेश राय

    साझा संकलन प्रकाशित। संप्रति शिक्षक के पद पर कार्यरत।   दर्द के भीतर दर्द ही मिला सबीर हका कीकविता शहतूत पढ़करदर्द से भर उठा कक्षा 10वीं में पढ़ाते हुएसभी छात्राओं सेपूछ बैठा अचानक ही-शहतूत देखा है कभीजिसे हमारे गांव मे तोंत कहते हैं बहुत-सी लड़कियों...
दो कविताएं : मिथिलेश राय

दो कविताएं : मिथिलेश राय

      युवा कवि। अंग्रेजी के शिक्षक। हमें होना चाहिए था हमें होना चाहिए थाझूठ के बीच तनकर खड़ासच की तरह रोटीसेकती स्त्री के लिएचूल्हे की आगऔर धान के बेहड़ रोपती स्त्री केकंठ में गीत की तरह किसी केपतझड़ में झड़ना था पीली औरपुरानी पत्तियों के साथकिसी के बसंत...