मोतीलाल दास

मोतीलाल दास

    भारतीय रेलवे में कार्यरत। कविता संग्रह ‘आखिर क्या करता’, ‘देह पर दिन की भाषा’और ‘समय के ढेर पर’। तुम्हारा आना तुम वैसे मत आनाजैसे उग आती है कहीं भी दूबजैसे जंगल में कोई भी पेड़जैसे प्रश्नों के बीच से कोई उत्तर तुम ऐसे आनाजैसे खिलती है कोई कलीजैसे मुस्काती...