2047 का भारत, प्रस्तुति : मृत्युंजय श्रीवास्तव

2047 का भारत, प्रस्तुति : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी। दुनिया के लोग आने वाले युग की कल्पना करते रहे हैं। कुछ तो सौ-सौ साल बाद की भी। अभी जी-20 की समाप्ति पर यह आशा व्यक्त की गई है कि 2047 तक देश विकसित हो जाएगा और अर्थव्यवस्था के मामले में तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगा। क्या तब...
तीन उपन्यास-कथा एक संगीत है : मृत्युंजय श्रीवास्तव

तीन उपन्यास-कथा एक संगीत है : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी।     क्या आप किसी ऐसी औरत को जानते हैं जो घर में चल रहे पूजा-पाठ और कर्मकांड के व्यापार से घुटन महसूस करती हो? क्या आप ऐसी किसी औरत से मिले हैं जो इस किस्म की वजहों से अपने दांपत्य जीवन को असफल मानती हो? ऐसी ही एक औरत है...
दो स्त्री रचनाकारों के उपन्यास : मृत्युंजय श्रीवास्तव

दो स्त्री रचनाकारों के उपन्यास : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी। इस वर्ष के आरंभ में ही दो ऐसे उपन्यास आ गए, जिनसे हिंदी कथा साहित्य समृद्ध होता दिख रहा है।यह एक संयोग ही है कि जिन उपन्यासों की चर्चा यहां होगी, उनकी रचनाकार स्त्रियां हैं।दोनों स्त्री रचनाकारों की चिंता और मांग भी समान...
जयशंकर प्रसाद और जैनेंद्र कुमार – जीवनी के दर्पण में : मृत्युंजय श्रीवास्तव

जयशंकर प्रसाद और जैनेंद्र कुमार – जीवनी के दर्पण में : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी। जयशंकर प्रसाद और जैनेंद्र कुमार की जीवनियां बहुतों के लिए उत्सुकता जगा सकती हैं, क्योंकि दोनों अपने-अपने समय के बड़े साहित्यकार रहे हैं।   प्रसाद के अवसान के ८३ वर्ष बाद आई यह जीवनी प्रसाद की रचनाओं की परतें भी खोलती है,...
जन बुद्धिजीवी और ग्रामचेतस : मृत्युंजय

जन बुद्धिजीवी और ग्रामचेतस : मृत्युंजय

    प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी। ऐसे समय में जब सोच की शोचनीय हालत हो और हर स्तर पर सोच के महा अकाल के दृश्य उपस्थित हों तथा बिना सोचे-समझे जीने की लत लग गई हो, विजय कुमार और नरेश चंद्रकर की संपादित किताब जन बुद्धिजीवी एडवर्ड सईद का जीवन और...