महात्मा गांधी और मशीन, अनुवाद : मृत्युंजय श्रीवास्तव

महात्मा गांधी और मशीन, अनुवाद : मृत्युंजय श्रीवास्तव

  मनुष्य सर्वोपरि है। मनुष्य के अंगों को शिथिल या दुर्बल बनाना मशीन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। यंग इंडिया : 13-11-1924 मेरा दृढ़ मत है कि जब मशीन युग की सारी देनें नष्ट हो जाएंगी, तब भी मनुष्य की कारीगरी बची रहेगी, जब हर प्रकार के शोषण के सारे अवसर खत्म हो जाएंगे,...
स्त्री कथाकारों की आंच पर देश : मृत्युंजय श्रीवास्तव

स्त्री कथाकारों की आंच पर देश : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी। 21वीं सदी में हिंदी कथा साहित्य के प्लैनेट पर स्त्रियों ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। अपनी प्रतिरोधात्मकता और रचनात्मकता से और अपने संख्या-बल से भी। पेरिस की सिमोन द बुआ का प्रसिद्ध कथन है, औरत पैदा नहीं होती, बनाई जाती...
संस्मरण का सौंदर्य :मृत्युंजय श्रीवास्तव

संस्मरण का सौंदर्य :मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी।   इधर अंग्रेजी की दो पुस्तकों ने ध्यान आकर्षित किया है। पहली है रामचंद्र गुहा की द कुकिंग ऑफ बुक्स : अ लिटरेरी मेमॉएर (हिंदी अनुवाद : सामने आते ही नहीं) । दूसरी है अरुंधती राय की मदर मेरी कम्स टु मी। दोनों पुस्तकें...
मोहन राकेश : आधुनिकता का संकट, प्रस्तुति : मृत्युंजय श्रीवास्तव

मोहन राकेश : आधुनिकता का संकट, प्रस्तुति : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी।   मोहन राकेश की ख्याति नई कहानी के एक प्रमुख रचनाकार के रूप में है, मगर उनकी मुकम्मल पहचान उनके नाटकों से बनी है। उनके लिखे नाटक ही हैं, जिनके जीवित पाठ की वजह से मोहन राकेश की उपस्थिति बनी हुई है। 1925 में जन्मे मोहन...
संस्मरण आगे का रास्ता बताता है : मृत्युंजय श्रीवास्तव

संस्मरण आगे का रास्ता बताता है : मृत्युंजय श्रीवास्तव

प्रबुद्ध लेखक, रंगकर्मी और संस्कृतिकर्मी। संस्मरण एक खास जीवन तथा काल को समझने का एक प्रभावशाली माध्यम है। यह कई बार एक युग के संघर्ष का दस्तावेजीकरण होता है। नागरिक समाज को संस्मरण पढ़कर समकालीन चुनौतियों से संघर्ष करने की ताकत मिलती है। संस्मरण व्यक्तित्व विहीन नहीं...