मुख्तार अहमद

मुख्तार अहमद

 वरिष्ठ कवि। कविता संग्रह ‘तुम अब स्वप्न नहीं देखतीं’, ‘जिंदगी जब हिसाब मांगती है’। मैं मरुस्थल में एक वृक्ष मैं मरुस्थल में एक वृक्ष होना चाहता हूँछायादार और फलदारजैसे मां का आंचलभूख में और धूप में असरदार। जब मां कहा पृथ्वी हो गई जब मां कहा पृथ्वी हो गयापिता कहा तो...
मुख्तार अहमद

मुख्तार अहमद

कवि और लेखक। ‘तुम अब स्वप्न नहीं देखतीं’, ‘जिंदगी जब हिसाब मांगती है’ (कविता संग्रह)। किसी को रोटी खाते हुए देखना किसी को रोटी खाते हुए देखता हूँ तोमुस्कुराता हूँमेरे मुस्कुराने का कोई मूल्य नहींजरूरी है उसका पेट भरनाभर पेट खाने के बाद कहना हरि बोलपूरी कायनात का सुख...