मुसाफिर बैठा की कविताएं

मुसाफिर बैठा की कविताएं

       दलित युवा कवि। दो काव्य संग्रह ‘बीमार मानस का गेह’ और ‘विभीषण का दुःख’। 1-यक्षिणी यक्षिणी को यदि जुबान होतीऔर उसे गढ़नेवाले मर्दों सेहिसाब लेने का अधिकारतो सोचोआज के रीति-मानस कवियो!तेरा क्या हाल होता? 2-वर्णभेद चुप्पी सवर्ण है गुस्सा दलित!चुप्पी...