कविता
सुपरिचित कवि। अद्यतन कविता संकलन ‘इन हाथों के बिना’। केदारनाथ अग्रवाल स्मृति शोध संस्थान से जुड़े। उत्सव का द़ृश्य न अब नदी थीन घाट थेन वे पत्थर थेजिन पर वह एड़ियांघिसती थी अपनी यह एक द़ृश्य थाजो अब नहीं हैघाट के पत्थरों केरोज कुछ न कुछ पिघलने काइस...
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सुपरिचित कवि। अद्यतन कविता संकलन ‘समय का अकेला चेहरा’। केदारनाथ अग्रवाल स्मृति शोध संस्थान से संबंद्ध। छोटी हरी घास 1.आते हुए घोड़ों की टापेंसुनाई नहीं पड़ींयह कौन है जोरौंद रहे हैंछोटी हरी घास कह रहे हैंडरो नहीं तुमहम तुम्हें नहींइस हरी छोटीघास के लिए आए...
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सुपरिचित कवि। अद्यतन कविता संकलन ‘इन हाथों के बिना’। केदारनाथ अग्रवाल स्मृति शोध संस्थान से जुड़े। मृत्यु समय जब लोग सुबहसूरज की तरह उठकरकाम के लिए निकल रहे हों ऊर्जा से भरे हुएहवा और धूप के हाथहाथ में लेकर घूम रहे हों चिड़ियां दानें की तलाश मेंकोसों दूर...
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सुपरिचित कवि।अद्यतन कविता संकलन ‘इन हाथों के बिना’।केदारनाथ अग्रवाल स्मृति शोध संस्थान से जुड़े। यह पृथ्वी हमारा घर है जितना सब को मालूम थाउतना मुझको भी मालूम है किकिसी सुबह शाम या आधी रात कोचला जाऊंगा मैंपता नहींईश्वर कहां रखेगा मेरी आत्मा को अपनी...
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सुपिरिचित कवि। अद्यतन कविता संकलन ‘इन हाथों के बिना’। केदारनाथ अग्रवाल स्मृति शोध संस्थान से जुड़े। जब मैं पैदा हुआ थाचांद में बैठी एक बुढ़िया की चर्चा हो रही थीबुढ़िया के काम के बारे मेंहर आदमी के अलग-अलग विचार थेपचास साल के आस-पास थे पिताइन...
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