नवीन दवे मनावत

नवीन दवे मनावत

    युवा कवि। ‘शब्द जब बन जाता है आईना’ काव्य संग्रह प्रकाशित। जो बनना चाहती हैंमेरी कविताएं मुझे अब खोजनी होगीकोई अलग पृथ्वीजहां नहीं दौड़ते हों रूढ़ियों के रथजहां नहीं मिलता हो अंधविश्वास को सुकूनजहां धर्म से नहीं निकलती निर्दयता की चीत्कारें मुझे खोजना होगा...