कविता
युवा कवयित्री। छात्रा, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय। नारीवादी मुद्दों पर सक्रिय। कथनी लंका चौराहे पर खड़े होकरभेदभाव को दुत्कारते हुएवापिस मुड़ते ही फेरने लगते हैंआंखें अतिक्रमण करती बस्तियों से यहां से छटकता धुआंइनका आसमां दूषित कर देता है एस्थेटिक के लिए...
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